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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जन्मदिन पर पहुंची ससुराल, प्रधानमंत्री मोदी ने 47600 करोड़ के प्रोजेक्ट्स की दी सौगात

ओडिशा /राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह पहाड़पुर पहुंचीं। यहां उनके जन्मदिन पर लोगों ने फूल देकर, पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और आदिवासी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उनका स्वागत किया जिले के पहाड़पुर गांव की अपनी यात्रा के दौरान पवित्र उपवन संथाली जाहेरा और हो जाहेरा, कौशल केंद्र और पहाड़पुर स्कूल में प्रार्थना की इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव का दौरा भी किया ।


प्रोजेक्ट्स जिनका उद्घाटन कर, नींव रखे पीएम मोदी

600 मेगावाट का अपर इंद्रावती पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट और IB थर्मल पावर स्टेशन का स्टेज-II विस्तार होगा। जिसमें 660 मेगावाट्स की दो यूनिट होंगी।
झारसुगुडा के लखनपुर में भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) प्रोजेक्ट की भी आधारशिला रखी जाएगी।
भुवनेश्वर में 300 टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट पर आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट, कटक-भुवनेश्वर को जोड़ने वाला काठाजोड़ी नदी ब्रिज शामिल है।
बौध में ढालपुर-हरभंगा सड़क का चौड़ीकरण, NH-353 के नुआपाड़ा-घाटीपाड़ा सेक्शन को फोरलेन बनाना, कुसुमडीही मेगा लिफ्ट सिंचाई प्रोजेक्ट शामिल है।
इसके अलावा IGNOU का रीजनल सेंटर और रायरंगपुर में एक इनडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स की नींव रखी जाएगी।
732 करोड़ रुपए से ज्यादा लागत वाले दो अहम मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे प्रोजेक्ट्स भी देश को समर्पित किए जाएंगे।
हिंडोल रोड-मेरामांडली मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट का भी उद्घाटन किया जाएगा। 27 किमी लंबे इस रेलवे प्रोजेक्ट को 409 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया था।
बौध में 300 बिस्तरों वाले अस्पताल की इमारत के साथ-साथ अलग-अलग जिलों में 24 अटल बस स्टैंड और 9 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों का भी उद्घाटन करेंगे।
अन्य प्रोजेक्ट्स में NH-57 पर नयागढ़ टाउन बाईपास, कुसुमी स्मार्ट सिंचाई प्रोजेक्ट का अंडरग्राउंड पाइपलाइन हिस्सा और रायरंगपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आदिवासी रिसर्च सेंटर शामिल हैं।


पहाड़पुर से मुर्मू ने शुरू किया था राजनीतिक करियर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक आदिवासी संथाल परिवार में हुआ था। उनकी शादी 1980 में श्याम चरण मुर्मू से हुई थी, जिनका पैतृक गांव मयूरभंज जिले का पहाड़पुर है। यहीं उनके ससुराल का घर है।

शादी के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने शिक्षक और सरकारी कर्मचारी के रूप में काम किया, फिर राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत की पार्षद के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया। 2000 और 2004 में रायरंगपुर से विधायक चुनी गईं और ओडिशा सरकार में मंत्री रहीं।

2015 में वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं। इसके बाद 2022 में राष्ट्रपति चुनाव जीतकर भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली पहली आदिवासी महिला बनीं।

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