Best Parenting Tips By Gaytri Singh: मां बाप को मिसगाइड करते बच्चे

बच्चे जब माँ-बाप को मिसगाइड करने लगते हैं…
कुछ बच्चे बहुत कम उम्र में ही समझ जाते हैं कि माँ-बाप की सबसे बड़ी कमजोरी उनका,उनके लिए प्यार है। और फिर उसी प्यार का इस्तेमाल वो अपनी मनमानी पूरी कराने के लिए करने लगते हैं।
सबसे पहले वे माँ-बाप को उनके अपने लोगों से दूर करते हैं।
“वो अंकल अच्छे नहीं हैं…”
“वो आंटी आपकी चुगली करती हैं…”
“उन रिश्तेदारों से दूर रहिए…”
“उनसे मिलना बंद कर दीजिए…”
माँ-बाप को लगता है कि बच्चा उनकी चिंता कर रहा है। लेकिन बच्चा अपने चारों तरफ ऐसा घेरा बना रहा होता है, जहाँ उसकी सच्चाई तक कोई पहुँच ही न सके।
सबसे दुखद बात यह है कि यह नियंत्रण माँ-बाप की भलाई के लिए नहीं होता। इसके पीछे अक्सर अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश होती है।
कहीं नशे की आदत छिपानी है…
कहीं किसी अफेयर को बिना रोक-टोक आगे बढ़ाना है…
कहीं माँ-बाप के पैसों को अपनी इच्छाओं पर खर्च करना है…
कहीं गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड को खुश रखने के लिए खर्च करना है… निर्धारित सीमा पार करनी है…
फिर शुरू होता है दूसरा खेल…
मोबाइल की दुनिया…
रात-रात भर चैट…
अफेयर…
महंगे गिफ्ट…
रेस्टोरेंट…
घूमना-फिरना…
और यह सब किसके पैसों से?
सब माँ-बाप के पैसों से।
जेब खर्च के नाम पर पैसे लेना, पढ़ाई के नाम पर पैसे लेना, कोचिंग, प्रोजेक्ट, दोस्तों के जन्मदिन, पेट्रोल, फॉर्म… हर दिन एक नया कारण।
माँ-बाप सोचते रहते हैं कि उनका बच्चा भविष्य बना रहा है, जबकि कई बार उनका पैसा किसी और का वर्तमान संवार रहा होता है।
अगर कभी माँ-बाप हिसाब पूछ लें तो तुरंत भावनात्मक हमला…
“आपको मुझ पर भरोसा नहीं है।”
“मेरे दोस्तों की बेइज्जती मत कीजिए।”
“हर बात में शक करना बंद कीजिए।”
“मैं घर छोड़ दूँगा… मैं घर छोड़ दूँगी…”
यहीं सबसे ज्यादा माँ-बाप हारते हैं।
वे डर जाते हैं कि कहीं बच्चा कोई गलत कदम न उठा ले। और इसी डर का फायदा कुछ बच्चे बार-बार उठाते हैं।
माता-पिता…
प्यार कीजिए, लेकिन आँखें बंद करके नहीं।
विश्वास कीजिए, लेकिन बिना प्रश्न पूछे नहीं।
जेब खर्च दीजिए, लेकिन उसका हिसाब भी जानिए।
मोबाइल दीजिए, लेकिन यह भी जानिए कि उसकी दुनिया में क्या चल रहा है।
दोस्तों को जानिए।
उनकी दिनचर्या जानिए।
उनके खर्च का तरीका जानिए।
यह जासूसी नहीं, अभिभावक होने की जिम्मेदारी है। हमें यह भी समझना चाहिए
अच्छे माँ-बाप वही नहीं होते जो हर माँग पूरी कर दें। अच्छे माँ-बाप वे होते हैं जो समय रहते “ना” भी कह सकें और अपने बच्चे को गलत रास्ते पर जाने से रोक सकें।
बच्चों से दोस्त बनिए, लेकिन इतने भी दोस्त मत बन जाइए कि आपका माँ-बाप होना भी आप भूल जाएँ।बच्चे जब अपनी निजी जिंदगी पर कोई सवाल बर्दाश्त न करें और हर प्रश्न का उत्तर इमोशनल ब्लैकमेल से दें… तो इसे केवल “नई पीढ़ी की सोच” कहकर मत टालिए। हो सकता है आपका बच्चा किसी ऐसी राह पर हो, जहाँ उसे आपकी सहमति नहीं, सिर्फ आपकी जेब चाहिए।
बच्चों को उनका बचपन जीने दीजिए।
उन्हें समय से पहले अपना अभिभावक मत बनाइए।
आज वे आपके संरक्षण में हैं। दुनिया को देखने, समझने और परखने का जो अनुभव आपके पास है, वह अभी उनके पास नहीं है। वे बुद्धिमान हो सकते हैं, पढ़े-लिखे हो सकते हैं, तकनीक में आपसे आगे हो सकते हैं, लेकिन जीवन का अनुभव अभी भी आपके हिस्से की पूँजी है।
अपने रोल को सही तरीके से परिभाषित कीजिए।
आप उनके मित्र बन सकते हैं, लेकिन सबसे पहले आप उनके माता-पिता हैं।
बच्चों की हर इच्छा पूरी करने से पहले एक प्रश्न स्वयं से पूछिए—
क्या यह उनकी वास्तविक आवश्यकता है, या मैं भावनात्मक दबाव में आकर उनके द्वारा ‘मैनिपुलेट’ हो रहा हूँ?
प्रेम और विश्वास का अर्थ कभी भी अपनी समझ को गिरवी रखना नहीं होता।
अच्छा पालन-पोषण हर माँग पूरी करना नहीं है। अच्छा पालन-पोषण सही समय पर सही निर्णय लेना है, चाहे उस समय बच्चा नाराज़ ही क्यों न हो जाए।



