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राजनेताओं के आसमानी खतरे ,गंवानी पड़ी जान

डेस्क/आमतौर पर कहा जाता है कि राजनीति में खतरा उसे पग पग पर मिलता है यह खतरा सिर्फ सड़क या मंच तक सीमित नहीं रहा ऐसे कई उदाहरण हैं जो बताते हैं कि राजनेताओं को आसमान में भी बड़े बड़े खतरे झेलने पड़े हैं।चुनावी दौरे, अचानक यात्राएं और समय की कमी के कारण नेताओं को हवाई सफर करना पड़ा। लेकिन कुछ सफर ऐसे रहे, जो मंजिल तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो गए। विमान और हेलीकॉप्टर हादसों में जान गंवाने वाले नेताओं की ये घटनाएं बताती हैं कि सत्ता के साथ जोखिम भी हमेशा उनके साथ रहता है।

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अजीत पावर 28 जनवरी 2026
एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा एक विमान बुधवार सुबह महाराष्ट्र के बारामती में लैंडिंग की कोशिश करते वक्त क्रैश हो गया. इस हादसे में अजित पवार का निधन हो गया.

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विजय रुपाणी: उड़ान भरते ही हुआ हादसा
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय रुपाणी 12 जून 2025 को अहमदाबाद से एयर इंडिया के विमान पर सवार होकर अपने परिवार से मिलने लंदन जा रहे थे, लेकिन उनका विमान उड़ान भरते ही क्रैश हो गया। हादसे में विमान सवार दो सौ से ज्यादा लोगों की मौतें हुई थीं।

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दोरजी खांडू: अचानक लापता हुआ विमान
अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दोरजी खांडू का निधन साल 2011 में एक विमान हादसे में हुआ था। उस समय उनकी उम्र 56 वर्ष थी। वे तवांग से राजधानी ईटानगर की ओर यात्रा कर रहे थे, तभी उनका विमान अचानक लापता हो गया। बाद में पता चला कि हादसे में उनकी जान चली गई। उन्होंने वर्ष 2007 से लेकर अप्रैल 2011 तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई।

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वाई.एस. राजशेखर रेड्डी:
2 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी नियमित दौरे पर निकले थे। उनका बेल-430 हेलीकॉप्टर खराब मौसम से जूझता हुआ नल्लामाला के घने जंगलों के ऊपर उड़ रहा था। अचानक संपर्क टूटा और बाद में मलबा पहाड़ियों के बीच मिला। यह हादसा सिर्फ एक मुख्यमंत्री की मृत्यु नहीं था, बल्कि राज्य की राजनीति में एक युग के अंत जैसा साबित हुआ।

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जीएमसी बालयोगी
लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी का नाम भारतीय संसदीय इतिहास में सम्मान से लिया जाता है। 3 मार्च 2002 को आंध्र प्रदेश में उनका हेलीकॉप्टर एक नियमित यात्रा पर था। भीमावरम से उड़ान भरने के बाद तकनीकी कारणों और परिस्थितियों के चलते चॉपर कृष्णा जिले के कैकलूर क्षेत्र में नियंत्रण खो बैठा और एक तालाब में जा गिरा। यह हादसा सिर्फ एक जान का नुकसान नहीं था, बल्कि संसद की गरिमा से जुड़ी एक बड़ी क्षति भी थी।

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माधवराव सिंधिया
30 सितंबर 2001 की सुबह कांग्रेस के दिग्गज नेता माधवराव सिंधिया एक राजनीतिक कार्यक्रम के लिए उड़ान पर थे। खुद नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके सिंधिया जिस निजी छोटे विमान में सवार थे, वह उत्तर प्रदेश के मैनपुरी क्षेत्र के पास मौसम की मार का शिकार हो गया। घने बादल और सीमित दृश्यता ने उड़ान को जानलेवा बना दिया। विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ और देश ने एक ऐसा नेता खो दिया, जो आधुनिक सोच और राजघराने की विरासत – दोनों का प्रतिनिधि था।

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संजय गांधी
23 जून 1980 का दिन भारतीय राजनीति के सबसे चौंकाने वाले हादसों में दर्ज है। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी को उड़ान का शौक था। दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास, एक हल्के विमान में हवाई करतब दिखाते समय संतुलन बिगड़ा। कुछ ही पलों में विमान जमीन से टकरा गया। युवा, प्रभावशाली और विवादों से घिरे संजय गांधी की मौत ने देश को हिला दिया और सत्ता के गलियारों में गहरा सन्नाटा भर दिया।

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बलवंतराय मेहता
गुजरात के ही एक अन्य पूर्व सीएम बलवंतराय मेहता का भी निधन विमान में हुआ था। उन्होंने 1963 से 1965 के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अहम भूमिका निभाई। भारत-पाक युद्ध के दौर में वे कच्छ के रण में हालात का जायजा लेने के लिए हवाई यात्रा पर निकले थे। उसी दौरान उनके विमान को पाकिस्तान की ओर से निशाना बनाया गया और वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में बलवंतराय मेहता के साथ उनकी पत्नी, तीन सहयोगी, एक पत्रकार और विमान के दो क्रू सदस्य भी अपनी जान गंवा बैठे। वह देश के पहले ऐसे बड़े राजनेता थे, जिनकी मौत विमान दुर्घटना में हुई थी।
इन दुर्घटनाओं ने बार-बार यह सवाल खड़ा किया कि वीआईपी उड़ानों की सुरक्षा कितनी पुख्ता है। मौसम की अनदेखी, तकनीकी सीमाएं और समय का दबाव – ये तीनों मिलकर कई बार जानलेवा साबित हुए। सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग भी प्रकृति और तकनीक के आगे असहाय हो सकते हैं, इन हादसों ने यही सिखाया।

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