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भगवान जगन्नाथ को भोग लगाने के बाद क्यों तोड़ दिया जाता है घड़ा? जानिए ‘अधर पान’ की अनोखी परंपरा

पुरी: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान कई ऐसी परंपराएं निभाई जाती हैं, जो सदियों पुरानी होने के साथ-साथ बेहद अनोखी भी हैं। इन्हीं में से एक है ‘अधर पान’ की रस्म, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को एक विशेष पेय का भोग लगाया जाता है। इस रस्म की सबसे खास बात यह है कि भोग अर्पित करने के तुरंत बाद उस पेय से भरे मिट्टी के घड़े को तोड़ दिया जाता है और श्रद्धालु इस प्रसाद को ग्रहण नहीं करते।

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अधर पान एक पारंपरिक मीठा पेय है, जिसे बेल का रस, कच्चा दूध, पका केला, नींबू, गुड़ और अन्य पारंपरिक सामग्री मिलाकर तैयार किया जाता है। इस पेय को बड़े मिट्टी के घड़े में भरकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके रथ पर अर्पित किया जाता है। यह रस्म रथ यात्रा के अंतिम चरण में पूरी विधि-विधान के साथ संपन्न होती है।

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धार्मिक मान्यता के अनुसार, अधर पान का यह प्रसाद अतृप्त आत्माओं, भूत-प्रेत और नर पिशाचों के लिए होता है। कहा जाता है कि भगवान को भोग अर्पित करने के बाद घड़े को इसलिए तोड़ा जाता है ताकि उसमें मौजूद पेय इन आत्माओं तक पहुंच सके। मान्यता है कि भगवान का यह प्रसाद ग्रहण कर इन आत्माओं को तृप्ति प्राप्त होती है। यही वजह है कि इस प्रसाद को श्रद्धालुओं के बीच वितरित नहीं किया जाता।

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जगन्नाथ संस्कृति में अधर पान की यह परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही आस्था का हिस्सा है। हालांकि, इसके पीछे की मान्यताएं धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं, लेकिन यही अनोखी परंपराएं भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को देश-दुनिया के सबसे खास धार्मिक आयोजनों में शामिल करती हैं।

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