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केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के पहले ही दिन एक दर्दनाक घटना सामने आई प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल

वडोदरा (बड़ौदा) के रहने वाले हेमंत माली, जो पिछले आठ सालों से चारधाम यात्रा में लोगों को गाइड करते आ रहे हैं, इस बार अपने माता-पिता को भी दर्शन के लिए साथ लाए थे। यह उनके माता-पिता की लंबे समय से इच्छा थी। लेकिन यह यात्रा उनके परिवार के लिए एक दुखद अनुभव बन गई। बुधवार सुबह, जब केदारनाथ मंदिर के कपाट इस साल के लिए पहली बार खुले, उसी दौरान उनके 78 वर्षीय पिता दिलीप माली अचानक मंदिर के पास ही गिर पड़े। हेमंत ने तुरंत सरकारी हेल्पलाइन पर फोन करके मेडिकल सहायता मांगी, लेकिन काफी देर तक कोई मदद नहीं पहुंची।

करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद, मजबूर होकर हेमंत ने अपने पिता को एक खच्चर (पोनी) पर बैठाकर अस्थायी अस्पताल तक पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हेमंत के मुताबिक, उस समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी केदारनाथ में मौजूद थे। उन्होंने स्थिति देखी और कुछ आश्वासन देकर चले गए। इसके बाद हेमंत लगातार प्रशासन से अपने पिता के शव को घर पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर की मांग करते रहे, लेकिन उन्हें घंटों तक इंतजार कराया गया।

बाद में अधिकारियों ने यह कहकर मना कर दिया कि हेलिकॉप्टर सेवाएं सुरक्षा मंजूरी न मिलने के कारण चालू नहीं हैं। इस पर हेमंत ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री वहां पहुंचे, तो फिर हेलिकॉप्टर कैसे चला। लेकिन उन्हें कोई साफ जवाब नहीं मिला। उन्होंने पूरे मामले को “पूरी तरह से कुप्रबंधन” बताया।

काफी देर बाद, जब उनकी परेशानी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया और एक हेलिकॉप्टर की व्यवस्था की गई। इससे उनके पिता के शव को रुद्रप्रयाग तक पहुंचाया गया। लेकिन मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। हेमंत का कहना है कि अब उन्हें रुद्रप्रयाग से बड़ौदा तक शव ले जाने के लिए एंबुलेंस के 50,000 रुपये देने को कहा जा रहा है। इस बीच उनकी मां लगातार फोन कर अपने पति की तबीयत के बारे में पूछ रही हैं, लेकिन हेमंत अभी तक उन्हें सच्चाई नहीं बता पाए हैं।

यह घटना न सिर्फ एक परिवार के दर्द को दिखाती है, बल्कि तीर्थयात्रा के दौरान प्रशासनिक तैयारियों और व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

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