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वेदांता समूह के दफ्तरों पर ED की छापेमारी, रॉयल्टी भुगतान की जांच तेज

नई दिल्ली, 2 जून/ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के कई दफ्तरों पर छापेमारी की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, जांच वेदांता लिमिटेड द्वारा अपनी मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को किए गए रॉयल्टी भुगतान से संबंधित है। ED की टीम मुंबई और दिल्ली स्थित कंपनी के दफ्तरों में दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

कंपनी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है। वेदांता के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “हम संबंधित अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनी सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। चूंकि मामला फिलहाल नियामकीय प्रक्रिया के तहत है, इसलिए इस पर अभी और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।”

इस खबर का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। सोमवार सुबह करीब 11:45 बजे वेदांता का शेयर 0.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 334.6 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

वेदांता लिमिटेड समूह की भारतीय सूचीबद्ध कंपनी है, जिसका बाजार पूंजीकरण लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये है। वहीं, ब्रिटेन स्थित वेदांता रिसोर्सेज इसकी मूल कंपनी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वेदांता रिसोर्सेज पर करीब 74,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कंपनी द्वारा मूल कंपनी को किए गए रॉयल्टी भुगतान को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वेदांता अपने कारोबार के बड़े पुनर्गठन यानी डिमर्जर की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। हाल ही में कंपनी को इस योजना के लिए विभिन्न नियामकीय मंजूरियां मिली हैं। डिमर्जर के तहत मौजूदा वेदांता कारोबार को पांच अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में बांटा जाएगा।

योजना के अनुसार, वेदांता लिमिटेड के पास हिंदुस्तान जिंक, जिंक इंटरनेशनल, कॉपर, फेरो क्रोम और नई तकनीकी परियोजनाओं का कारोबार रहेगा। वहीं, वेदांता एल्युमिनियम कंपनी एल्युमिनियम कारोबार, कैप्टिव पावर प्लांट और बाल्को में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी का संचालन करेगी। वेदांता पावर के पास थर्मल पावर परिसंपत्तियां होंगी, जिनमें तलवंडी साबो प्लांट भी शामिल है। इसके अलावा, वेदांता ऑयल एंड गैस कंपनी कैर्न ऑयल एंड गैस कारोबार संभालेगी, जबकि वेदांता स्टील एंड फेरस कंपनी लौह अयस्क खदानों और ईएसएल स्टील प्लांट का संचालन करेगी।

फिलहाल ED की जांच जारी है और इस मामले में आगे आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

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