यंग राइटर्सलाइफस्टाइल

मै बस्तर का विकास बोल रहा हूं- कपिल दीक्षित की कलम से

ना सड़कें हैं, ना बिजली,
मैं प्यास बोल रहा हूँ,
अंधेरों में भी उम्मीद लिए,
मैं विश्वास बोल रहा हूँ।
नक्सल मुक्त बस्तर का विकास बोल रहा हूँ।


कटते वृक्षों की धूल में,
मैं नई आस बोल रहा हूँ,
उजड़ती हरियाली के बीच,
प्रकृति की आवाज़ बोल रहा हूँ।
नक्सल मुक्त बस्तर का विकास बोल रहा हूँ।


उफनती नदियों की धार बोल रहा हूँ,
टूटे पुलों का दर्द बोल रहा हूँ,
बंद रास्तों में रुकी जिंदगी,
उसका इंतजार बोल रहा हूँ।
नक्सल मुक्त बस्तर का विकास बोल रहा हूँ।


मैं जंगल की हरियाली,
मैं गांवों की आस बोल रहा हूँ,
शांति, सड़क और विकास की,
एक नई आवाज़ बोल रहा हूँ।
नक्सल मुक्त बस्तर का विकास बोल रहा हूँ।

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लेखक – कपिल दीक्षित

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