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नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र निधन, मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज

पणजी, 8 अक्टूबर: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। वह गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर बेहोश मिले थे, जिसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनकी मौत की शुरुआती वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई है। मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमॉर्टम भी कराया जाएगा।

डॉक्टर शेखर सालकर के मुताबिक, नाना पाटेकर ने तबीयत खराब होने की बात बताते हुए रात में एक दोस्त को मैसेज किया था। दोस्त सुबह उनके घर पहुंचे, जहां नाना पाटेकर पसीने में थे और धीरे-धीरे बेहोश हो रहे थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। गोवा मेडिकल कॉलेज ने पोस्टमॉर्टम के लिए तीन डॉक्टरों की टीम बनाई है, जिससे मौत की मेडिकल वजह की आगे जांच हो सकेगी।

नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन समेत फिल्म और राजनीतिक जगत की कई हस्तियों ने शोक जताया। अक्षय कुमार ने उन्हें “one of a kind” बताते हुए उनके अभिनय, आवाज और हर किरदार में दिखने वाली ईमानदारी को याद किया। वहीं, रवि किशन ने उन्हें भारतीय सिनेमा के महान कलाकारों में से एक बताया। महाराष्ट्र सरकार ने नाना पाटेकर के सिनेमा और थिएटर में योगदान को देखते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने का फैसला किया है।

नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार महाराष्ट्र के पुणे जिले के डोंजे स्थित उनके फार्महाउस में किया जाएगा। उनकी संस्था नाम फाउंडेशन के मुताबिक, पार्थिव शरीर को गुरुवार शाम पुणे लाया जाएगा और इसके बाद अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में जन्मे नाना ने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।

उन्हें तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड और पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। गंभीर किरदारों के साथ-साथ ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का उनका कॉमिक किरदार भी बेहद लोकप्रिय हुआ। उन्होंने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ से डायरेक्शन में भी कदम रखा था। हिंदी सिनेमा के साथ उनका मराठी थिएटर और फिल्मों से भी गहरा जुड़ाव रहा।

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